भारत का आपराधिक कानून 2025: न्याय की नई क्रांति – मुख्य बातें
2025 में भारत का आपराधिक न्याय तंत्र पूरी तरह बदल चुका है। 1 जुलाई 2024 से लागू तीन ऐतिहासिक कानूनों ने ब्रिटिश काल के IPC, CrPC और Evidence Act को हमेशा के लिए विदा कर दिया है। अब देश में चल रहे हैं:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे 21वीं सदी का सबसे बड़ा सुधार बताया है। अब फोकस सजा से हटकर न्याय, पीड़ित के अधिकार, और तकनीक पर है। आइए एक नजर डालते हैं 2025 की सबसे बड़ी हाइलाइट्स पर:
1. पीड़ित अब केंद्र में
- महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों (ट्रैफिकिंग, यौन शोषण) के लिए कड़े और अलग प्रावधान
- छोटे अपराधों में जेल की बजाय सामुदायिक सेवा का विकल्प
2. फोरेंसिक जांच अनिवार्य
- 7 साल या उससे ज्यादा सजा वाले हर गंभीर अपराध में क्राइम सीन पर फोरेंसिक टीम जाना अब जरूरी
- बयानों पर निर्भरता कम, सबूतों पर भरोसा ज्यादा
3. तकनीक से भरा नया सिस्टम
- कहीं भी दर्ज करें जीरो FIR और ई-एफआईआर
- समन, चार्जशीट, गवाही – सब ऑनलाइन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से
- ईमेल, वीडियो, चैट अब पूरी तरह कानूनी सबूत माने जाते हैं
4. समयबद्ध न्याय
- ज्यादातर केस में जांच 90 दिन में पूरी
- बहस के बाद फैसला 60 दिन में
- लक्ष्य: 2026 तक हर FIR का निपटारा 3 साल में
5. पुलिस की जवाबदेही बढ़ी
- जांच में लापरवाही पर सजा का प्रावधान
- 2024-25 में 40 लाख से ज्यादा पुलिसकर्मियों को नई संहिताओं की ट्रेनिंग दी गई
6. सुधार और पुनर्वास पर जोर
- कैदियों को स्किल ट्रेनिंग, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता
- नाबालिग अपराधियों का मुख्य लक्ष्य – समाज में वापसी
- छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया
चुनौतियाँ अभी भी बाकी
चंडीगढ़ जैसे कुछ राज्यों में 100% लागू हो चुका है, लेकिन कई जगहों पर संसाधनों की कमी और नई प्रक्रियाओं को समझने में दिक्कत आ रही है। आने वाले सालों में और ट्रेनिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है।
निष्कर्ष 2025 का भारत अब दंड देने वाला नहीं, न्याय देने वाला देश बन रहा है। यह सिर्फ कानून का बदलाव नहीं, सोच का बदलाव है। अब न्याय तेज है, पारदर्शी है, और आम आदमी के करीब है।
⚖️ भारत का नया आपराधिक कानून – विकसित भारत की नींव! कानूनी सलाह के लिए हमेशा योग्य वकील से संपर्क करें। जय हिंद!